प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) को 11 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और कृषि ऋण की सीमित उपलब्धता वाले 100 जिलों में खेती की स्थिति सुधारना है। योजना का पहला साल पूरा होने पर सरकार ने बताया कि सभी 100 जिलों में कृषि विकास के लिए जिला कार्ययोजनाएं तैयार कर लागू की जा रही हैं।
PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना |
| शुरुआत | 11 अक्टूबर 2025 |
| लक्षित क्षेत्र | 100 चयनित कृषि जिले |
| योजना की अवधि | 6 वर्ष, 2025-26 से |
| संबंधित मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| आधिकारिक डैशबोर्ड | https://pmddky.niti.gov.in/ |
एक साल में योजना के तहत क्या बदला?
सरकार की अक्टूबर 2026 की जानकारी के अनुसार, योजना के पहले साल में सभी 100 चयनित जिलों ने अपनी जिला कार्ययोजनाएं तैयार कर ली हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जरूरतों के अनुसार सिंचाई, फसल उत्पादन, कृषि ऋण और फसल कटाई के बाद भंडारण जैसी समस्याओं पर काम किया जा रहा है।
सरकारी डैशबोर्ड पर छह प्रमुख उद्देश्यों के औसत स्कोर में भी सुधार दर्ज किया गया। अप्रैल 2026 में यह औसत स्कोर 18.85 था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 46.89 हो गया। यह सुधार योजना के निगरानी संकेतकों पर प्रगति दर्शाता है, लेकिन इसे किसानों की आय या फसल उत्पादन में उतनी ही वृद्धि का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
किसानों को क्या फायदा मिल सकता है?
1. खेती की उत्पादकता में सुधार
कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में कृषि तकनीक, बेहतर खेती के तरीकों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार सहायता पर जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों को प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
2. सिंचाई सुविधाओं पर ध्यान
जहां सिंचाई की कमी है, वहां पानी के बेहतर प्रबंधन और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जा सकता है। इससे बारिश पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
3. फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती
योजना का उद्देश्य किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल दूसरी फसलों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। इससे कुछ क्षेत्रों में एक ही फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
4. फसल भंडारण और बेहतर बाजार अवसर
पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना योजना का प्रमुख लक्ष्य है। बेहतर भंडारण से किसानों को उपज सुरक्षित रखने और बिक्री के समय को लेकर अधिक विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ स्थानीय स्तर पर सुविधाओं के निर्माण और उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
5. कृषि ऋण तक पहुंच
योजना में अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर करने पर भी जोर है। इससे पात्र किसानों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए संस्थागत ऋण तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है।
योजना के तहत किन क्षेत्रों पर काम हो रहा है?
PM-DDKY के तहत 11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़कर काम किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार राज्य सरकारों की योजनाओं और स्थानीय भागीदारी को भी शामिल किया जा सकता है।
योजना के छह प्रमुख लक्ष्य हैं:
- कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
- फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना।
- फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाना।
- सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना।
- कृषि ऋण तक पहुंच बेहतर बनाना।
- सरकारी सेवाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार करना।
क्या हर किसान को सीधे पैसे मिलेंगे?
नहीं। PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana को सभी किसानों के बैंक खातों में सीधे एक निश्चित राशि भेजने वाली योजना के रूप में नहीं बताया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य चयनित जिलों में कृषि विकास के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और संसाधनों का समन्वय करना है।
किसान को मिलने वाला वास्तविक लाभ उसके जिले में लागू गतिविधियों, संबंधित योजनाओं की पात्रता और उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर करेगा। किसी विशेष सब्सिडी, ऋण या सहायता के लिए संबंधित योजना के अलग नियम लागू हो सकते हैं।
किसान अपने जिले की प्रगति कैसे देखें?
किसान योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmddky.niti.gov.in/ पर जाकर चयनित जिलों और उपलब्ध प्रगति संबंधी जानकारी देख सकते हैं। किसी सुविधा या सहायता के लिए अपने जिले के कृषि विभाग, जिला कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करना उपयोगी रहेगा।
PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana के पहले साल में 100 जिलों की कार्ययोजनाएं तैयार हुईं और सरकारी निगरानी संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया। अब योजना की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि किसानों को सिंचाई, बेहतर उत्पादन, भंडारण और कृषि ऋण जैसी सुविधाओं का कितना लाभ मिलता है। किसानों को अपने जिले में लागू योजनाओं और पात्रता की जानकारी स्थानीय कृषि विभाग से जरूर लेनी चाहिए।